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Issue - 2024 Page No - 55
बौद्ध धर्म एवं सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर : भारत और चीन
हिमांशु द्विवेदी*
सारांश :
बदलती विश्व व्यवस्था में महाशक्तियों के बीच बीते दशकों में तेजी से संघर्ष बढ़ रहा है और नई महाशक्तियाँ विश्व व्यवस्था में अपना योगदान बढ़ाने का प्रयास कर रहीं हैं। भारत और चीन एशियाई शक्ति के रूप में अपनी पैठ को पुष्ट करने के उपरांत अब विश्व पटल पर महाशक्ति के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। किंतु चीन ने पिछले कुछ दशकों में जिस प्रकार तीव्र छलांग लगाई है, भारत उसके मुकाबले लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ा है। महाशक्ति बनने के लिए कई सारे घटक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिनमे से संस्कृति एक महत्वपूर्ण पक्ष के रूप में है। जिसकी आगे इस लेख में विस्तृत चर्चा की जानी है कि किस प्रकार से चीन द्वारा बीते दशक से बौद्ध धर्म को लेकर सांस्कृतिक सर्वोच्चता दिखाने और दक्षिण पूर्वी एशिया में बौद्ध धर्म को लेकर अपनी महत्ता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है जो कि भारत के लिए एक बड़ी चुनौती प्रस्तुत कर रहा है, जो दोनों देशों के मध्य सॉफ्ट पॉवर को बढ़ाकर एशिया में अपना प्रभाव और वर्चस्व स्थापित करके सांस्कृतिक श्रेष्ठता को स्थापित करने की प्रतिद्वंदिता से संबंधित है।
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